उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को देश का अग्रणी Expressway राज्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अनुपूरक बजट में लगभग ₹18,400 करोड़ का प्रावधान नए एक्सप्रेसवे और लिंक प्रोजेक्ट्स के लिए किया गया है। इसका मकसद गंगा एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे बड़े कॉरिडोर को एक-दूसरे से जोड़कर हाई-स्पीड नेटवर्क ग्रिड बनाना है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पाँच नए Link Expressway का शिलान्यास होने की संभावना है। इन सभी को 3 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। भूमि अधिग्रहण का काम 80 से 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है। टेंडर जारी हो चुके हैं और कंपनियों को काम आवंटित होते ही निर्माण शुरू हो जाएगा। इनके पूरा होने के बाद यूपी में एक्सप्रेसवे की संख्या लगभग 20 हो जाएगी।
ये परियोजनाएँ मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) द्वारा क्रियान्वित की जा रही हैं। इससे पश्चिमी यूपी (फर्रुखाबाद, बुलंदशहर, इटावा, आगरा, नोएडा/गौतमबुद्ध नगर) और बुंदेलखंड (झांसी, जालौन, चित्रकूट) को सबसे अधिक लाभ मिलेगा।
प्रमुख परियोजनाओं का विवरण
1. जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट)–Ganga Expressway Link
- रूट: नोएडा सेक्टर-21 (फिल्म सिटी के पास / यमुना एक्सप्रेसवे के लगभग 24.8 किमी पॉइंट) से शुरू होकर बुलंदशहर होते हुए स्याना के पास गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।
- लंबाई: लगभग 74.5 किमी (ग्रीनफील्ड, 6-लेन, भविष्य में 8-लेन तक विस्तार योग्य)।
- लागत: लगभग ₹8,585–8,586 करोड़ (राज्य द्वारा EPC मॉडल पर वित्त पोषित)। अनुपूरक बजट में लगभग ₹250 करोड़ का प्रावधान।
- स्थिति व समय सीमा: कैबिनेट मंजूरी प्राप्त; भूमि अधिग्रहण उन्नत चरण में; लगभग 3 साल में पूरा करने का लक्ष्य।
- लाभ: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक पश्चिमी यूपी से सीधी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी, कार्गो मूवमेंट में वृद्धि, YEIDA के औद्योगिक सेक्टर (28, 29, 32, 33) को बेहतर पहुँच। बुलंदशहर से नोएडा की यात्रा मात्र 35–40 मिनट में। आगरा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक पहुँच आसान।
2. फर्रुखाबाद ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे
- रूट: इटावा में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
- लंबाई: लगभग 90–92 किमी (6-लेन विस्तार योग्य)।
- लागत: अनुपूरक प्रावधान में पहले लगभग ₹400 करोड़ का उल्लेख; पूर्ण परियोजना लागत अधिक।
- लाभ: फर्रुखाबाद (आलू उत्पादन और टेक्सटाइल प्रिंटिंग का प्रमुख केंद्र) को मुख्य Expresswayनेटवर्क से सीधे जोड़ेगा। दिल्ली-लखनऊ बाजारों तक माल तेजी से पहुँचेगा। इटावा से हरदोई की यात्रा लगभग 1 घंटे में। खिमसेपुर और आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क बनाने की योजना।
3. झांसी लिंक एक्सप्रेसवे
- रूट: झांसी को सीधे Bundel Khand Expressway से जोड़ेगा। जालौन के फूलपुरा गाँव के पास से शुरू होकर झांसी के पिपरा तक। गरौठा, टहरौली, मोंठ और सदर तहसील से होकर गुजरेगा।
- कवरेज: झांसी और जालौन के लगभग 63 गाँव।
- लाभ: झांसी से दिल्ली की यात्रा लगभग 4 घंटे में। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र और डिफेंस कॉरिडोर को लाभ। स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा।
4. लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे (आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल)
- रूट: मोहान रोड (लखनऊ) के पास आगरा-लखनऊ Expressway से शुरू होकर गोसाईगंज के पास पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।
- लंबाई: लगभग 51 किमी (6-लेन विस्तार योग्य)।
- लाभ: दिल्ली/आगरा से अयोध्या, आजमगढ़, गाजीपुर या वाराणसी जाने वाले वाहनों को लखनऊ शहर से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 1.5–2 घंटे की बचत। मोहान रोड से रायबरेली रोड तक मात्र 20–25 मिनट।
5. चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे
- रूट: भरतकूप के पास बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से शुरू होकर बेड़ी पुलिया-रामघाट मार्ग पर रानीपुर भट्ट/अहमदगंज तक।
- लाभ: दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ और आगरा से चित्रकूट धाम तक सीधी कनेक्टिविटी। दिल्ली से चित्रकूट लगभग 6 घंटे में। धार्मिक पर्यटन (रामघाट, कामदगिरि, मंदाकिनी घाट) को बढ़ावा। स्थानीय लकड़ी के खिलौने और हस्तशिल्प के बाजार तक पहुँच आसान।
अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाएँ
विंध्य एक्सप्रेसवे (Vindhya Expressway)
- रूट: प्रयागराज में गंगा एक्सप्रेसवे के अंतिम छोर से शुरू होकर भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी/चंदौली होते हुए सोनभद्र (NH-39 के पास) तक।
- लंबाई: 333 किमी (6-लेन ग्रीनफील्ड, 8-लेन तक विस्तार योग्य)।
- लागत: कुल अनुमानित ₹26,315 करोड़ (निर्माण + भूमि अधिग्रहण)। अनुपूरक बजट में पहले लगभग ₹6,580 करोड़ का आवंटन। पहाड़ी और नदी वाले इलाके के कारण प्रति किमी लागत अधिक।
- समय सीमा: 36 महीने में पूरा करने का लक्ष्य।
- लाभ: विंध्य और पूर्वांचल के औद्योगिक व खनिज संपन्न जिलों को जोड़ेगा। मध्य प्रदेश, झारखंड आदि से कनेक्टिविटी बेहतर।
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे
- रूट: सोनभद्र/चंदौली क्षेत्र को गाजीपुर के पास पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
- लंबाई: 117 किमी।
- लागत: लगभग ₹9,039–9,041 करोड़ (पहले आवंटन लगभग ₹2,380 करोड़)।
- लाभ: सोनभद्र और चंदौली को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ और दिल्ली से सीधे कनेक्टिविटी।
गंगा एक्सप्रेसवे का विस्तार (मेरठ से हरिद्वार की ओर)
- मेरठ से आगे मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए हरिद्वार (उत्तराखंड) तक विस्तार। अनुपूरक बजट में लगभग ₹5,780 करोड़ का प्रावधान। मुख्य 594 किमी मेरठ-प्रयागराज गंगा Expressway पहले से महत्वपूर्ण कॉरिडोर है।
अन्य सहायक कार्य
- चिल्ला रेगुलेटर एलिवेटेड फ्लाईओवर (दिल्ली-नोएडा, मयूर विहार से महामाया फ्लाईओवर क्षेत्र): लगभग ₹100 करोड़।
- एक्सप्रेसवे के दोनों ओर औद्योगिक गलियारे के विकास के लिए अतिरिक्त प्रावधान।
ये परियोजनाएँ यात्रा समय में भारी कमी लाएँगी, लॉजिस्टिक्स और कृषि (विशेषकर फर्रुखाबाद-हरदोई) को मजबूत करेंगी, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहुँच बढ़ाएँगी, बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्रों के औद्योगिक व डिफेंस कॉरिडोर को सहारा देंगी तथा पर्यटन (चित्रकूट आदि) को बढ़ावा देंगी।
UPEIDA इन ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर की मुख्य एजेंसी है। भूमि अधिग्रहण की उच्च प्रगति और टेंडर प्रक्रिया के साथ शिलान्यास और निर्माण जल्द शुरू होने की उम्मीद है। प्राथमिक Link Expressway के लिए 3 साल का स्पष्ट लक्ष्य 2027 के चुनाव से पहले रखा गया है।
यह विस्तार उत्तर प्रदेश को उत्तरी भारत का प्रमुख लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।





