Rameshwar Paradeep coastal highway :4 जिलों की बदलेगी तस्वीर! रामेश्वर-पारादीप तटीय राजमार्ग पर 17 बोलियां, यात्रा 2.5 घंटे कम

Rameshwar Paradeep coastal highway :4 जिलों की बदलेगी तस्वीर! रामेश्वर-पारादीप तटीय राजमार्ग पर 17 बोलियां, यात्रा 2.5 घंटे कम

नई दिल्ली / भुवनेश्वर: Rameshwar Paradeep coastal highway : ओडिशा के तटीय इलाके की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाले रामेश्वर-पारादीप तटीय राजमार्ग प्रोजेक्ट पर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को इस 160 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के लिए बोलीदाताओं से जबरदस्त रुचि मिली है। दोनों पैकेजों में कुल 17 बोलियां आई हैं। जून 2026 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी मिलने के बाद अब परियोजना आवंटन की दिशा में आगे बढ़ गई है।

दो पैकेजों में बंटा है 8,300 करोड़ का प्रोजेक्ट

एनएचएआई ने निर्माण के लिए बोलियां दो हिस्सों में आमंत्रित की थीं और दोनों में उत्साहजनक भागीदारी रही।

  • पैकेज-1: Rameshwar से कोणार्क तक 79.4 किलोमीटर, चार लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़क — 10 बोलियां
  • पैकेज-2: कोणार्क से पारादीप तक 80.7 किलोमीटर, दो लेन पक्की शोल्डर वाली सड़क — 7 बोलियां

परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मोड (एचएएम) के तहत आवंटित की जाएगी। कैबिनेट ने इसकी कुल पूंजी लागत 8,300.79 करोड़ रुपये मंजूर की है। इसमें पैकेज-1 की लागत 5,304.80 करोड़ और पैकेज-2 की 2,995.99 करोड़ रुपये है। भूमि अधिग्रहण सहित पूर्व-निर्माण लागत करीब 1,419.75 करोड़ रुपये है। बोलियां 28 अगस्त को खोली गईं। तकनीकी मूल्यांकन चल रहा है, बोलीदाताओं के नाम अभी आधिकारिक रूप से जारी नहीं किए गए हैं।

किन जिलों से गुजरेगा राजमार्ग

यह तटीय गलियारा ओडिशा के खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से होकर गुजरेगा। डिजाइन स्पीड 100 किमी प्रति घंटा रखी गई है। पूरा होने पर रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा का समय करीब 2 घंटे 30 मिनट कम हो जाएगा।

पुरी और कोणार्क तक सीधी और तेज पहुंच

मौजूदा एनएच-16 स्वर्ण चतुर्भुज का हिस्सा है और खुर्दा, भुवनेश्वर व कटक जैसे शहरों से गुजरता है। एनएच-316 भुवनेश्वर को पुरी से जोड़ता है और आगे सतपाड़ा व कोणार्क की ओर जाता है। पुरी-सतपाड़ा और पुरी-कोणार्क मार्गों पर करीब 40 प्रतिशत सड़कों के किनारे निर्माण हो चुका है। स्थानीय यात्रियों की भारी आवाजाही के कारण ये मार्ग तेज गति वाले लंबी दूरी के वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं रह गए हैं।

नया रामेश्वर-पारादीप कॉरिडोर एनएच-16 और एनएच-316 का विकल्प बनेगा। इससे श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी बीच और कोणार्क सूर्य मंदिर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीधी पहुंच मिलेगी। पारादीप बंदरगाह, प्रस्तावित पुरी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ अस्तरंग और सुवर्णरेखा जैसे विकासशील बंदरगाहों तक भी आवागमन आसान होगा।

श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी — नए तटीय गलियारे से तीर्थयात्रियों की पहुंच तेज होगी।

कोणार्क सूर्य मंदिर — पैकेज-1 यहीं तक चार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड राजमार्ग के रूप में बनेगा।

पारादीप बंदरगाह — पैकेज-2 यहीं जाकर जुड़ेगा, जिससे माल ढुलाई की लागत घटने की उम्मीद है।

रोजगार और उद्योग को मिलेगी रफ्तार

निर्माण के दौरान परियोजना से करीब 53.6 लाख प्रत्यक्ष मानव-दिवस और 67 लाख अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है। नियंत्रित पहुंच वाले इस तेज गलियारे से ईंधन खपत, कार्बन उत्सर्जन और वाहन संचालन लागत घटने के साथ रसद खर्च भी कम होगा। इससे पूरे तटीय क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पीएम गतिशक्ति के अनुरूप यह गलियारा कई आर्थिक और लॉजिस्टिक नोड्स को जोड़ेगा। इनमें भुवनेश्वर-खुर्दा के एसईजेड, मेगा फूड पार्क, पुरी-कोणार्क-पारादीप-जगतसिंहपुर-केंद्रपाड़ा के मत्स्य क्लस्टर, कटक का फार्मा क्लस्टर, पुरी रेलवे स्टेशन, पुरी एयरपोर्ट, अस्तरंग पोर्ट, पारादीप पोर्ट और जगतसिंहपुर का एमएमएलपी शामिल हैं।

अब आगे क्या

दोनों पैकेजों की रियायत अवधि 17.5 वर्ष रखी गई है — 2.5 वर्ष निर्माण और 15 वर्ष संचालन-रखरखाव। तकनीकी मूल्यांकन पूरा होने के बाद परियोजना आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह गलियारा लंबे समय से चर्चा में रहे तटीय राजमार्ग का अहम हिस्सा है और पर्यटन, बंदरगाह व स्थानीय रोजगार तीनों मोर्चों पर असर डाल सकता है।