उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में छिपा हुआ कार्तिक स्वामी मंदिर (Kartik Swami Temple) भगवान शिव के बड़े बेटे कार्तिकेय (मुरुगन) को समर्पित एक शांत और खूबसूरत जगह है। रुद्रप्रयाग के पास स्थित यह ऑफबीट जगह सिर्फ 3 किमी के आसान ट्रेक के साथ 360 डिग्री बर्फीली चोटियों का नजारा देती है। 3050 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह मंदिर आध्यात्मिक शांति, प्रकृति प्रेमियों और नए ट्रेकर्स के लिए परफेक्ट है। अगर आप 2026 में उत्तराखंड घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो कार्तिक स्वामी मंदिर ट्रेक (Kartik Swami Temple Trust) जरूर शामिल करें – यहां भक्ति, एडवेंचर और हिमालय की जादुई सुंदरता का मिश्रण मिलेगा!
Kartik Swami Temple क्यों जाएं: इस छिपे हुए मंदिर का जादू
Kartik Swami Temple उत्तराखंड में कार्तिकेय जी को समर्पित कुछ चुनिंदा मंदिरों में से एक है। कथा के अनुसार, कार्तिकेय जी ने यहां माता-पिता के प्रति अपनी भक्ति दिखाते हुए अपनी हड्डियां अर्पित की थीं – इसलिए यहां की मूर्ति को उस बलिदान का प्रतीक माना जाता है।
लेकिन असली आकर्षण है लोकेशन! संकरी रिज पर बसा मंदिर चारों तरफ हजारों घंटियों से घिरा है। हवा चलते ही घंटियां बजती हैं और शांत संगीत सा माहौल बन जाता है। यहां से चौखंबा, केदारनाथ, नीलकंठ, त्रिशूल, बंदरपूंछ जैसी बड़ी-बड़ी चोटियों का पूरा 360 डिग्री व्यू मिलता है। सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा तो कमाल का – बर्फ पर सुनहरी रोशनी!
Kartik Swami Temple का आसान ट्रेक
ट्रेक कनकचौरी गांव से शुरू होता है और सिर्फ 3 किमी का है – बिगिनर्स और फैमिली के लिए भी आसान।
ट्रेक की पूरी डिटेल:
- दूरी: 3 किमी (एक तरफ)
- समय: ऊपर जाने में 1.5 से 2 घंटे (आपकी स्पीड पर)
- कठिनाई: आसान से मध्यम – रास्ता अच्छा बना है, आखिर में कुछ सीढ़ियां हैं
- ऊंचाई: करीब 2000 मीटर से 3050 मीटर तक
रास्ते में ओक और रोडोडेंड्रोन के जंगल, खुले मैदान और खूबसूरत व्यू पॉइंट्स मिलेंगे। मौसम में जंगली फूल और पक्षी देखने को मिलते हैं। चोप्ता-तुंगनाथ जैसे बड़े ट्रेक से कम भीड़ यहां शांति ज्यादा मिलती है।
Kartik Swami Temple पर क्या देखें
- छोटा लेकिन खूबसूरत मंदिर और अनोखी मूर्ति
- हजारों घंटियां जो देखने और सुनने में कमाल की लगती हैं
- प्रेयर फ्लैग्स हवा में लहराते हुए
- हर तरफ हिमालय का नजारा – फोटो और ध्यान के लिए बेस्ट
2026 में Kartik Swami Temple घूमने का सबसे अच्छा समय
कार्तिक स्वामी ट्रेक का बेस्ट टाइम मार्च से जून (वसंत/गर्मी) है – साफ आसमान, फूलों से भरा रास्ता और सुहावना मौसम। सितंबर से नवंबर भी शानदार – बारिश के बाद ताजगी और सुनहरी चोटियां।
सर्दियों (दिसंबर-फरवरी) में बर्फ पड़ती है, नजारा जादुई लेकिन ठंड ज्यादा और रास्ता फिसलन भरा – तैयार होकर ही जाएं। जुलाई-अगस्त में भारी बारिश और लैंडस्लाइड का खतरा रहता है, बचें।
2026 के लिए अप्रैल-मई में रोडोडेंड्रोन फूलों का मजा लें या अक्टूबर में क्रिस्प मौसम। कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर-नवंबर) में ज्यादा भक्त आते हैं।
मंदिर के टाइमिंग और एंट्री डिटेल
मंदिर साल भर खुला रहता है, सूर्योदय से सूर्यास्त तक। कोई फिक्स टाइमिंग नहीं, लेकिन शाम की आरती बहुत अच्छी लगती है।
एंट्री फ्री है, लेकिन ट्रेक शुरू होने पर फॉरेस्ट फी (₹10-50) लग सकती है।
कार्तिक स्वामी मंदिर कैसे पहुंचें: पूरी ट्रैवल गाइड
कार्तिक स्वामी रुद्रप्रयाग से पोखरी रोड पर करीब 40 किमी दूर है।
बड़े शहरों से:
- रोड से दिल्ली: 370-400 किमी हरिद्वार-ऋषिकेश-देवप्रयाग-रुद्रप्रयाग होते हुए (10-12 घंटे)। रुद्रप्रयाग से शेयर्ड टैक्सी या जीप कनकचौरी तक (₹100-200 प्रति व्यक्ति)।
- निकटतम रेलवे: हरिद्वार या ऋषिकेश (रुद्रप्रयाग से 140-160 किमी)।
- निकटतम एयरपोर्ट: जॉली ग्रांट, देहरादून (180-200 किमी)।
रुद्रप्रयाग से कनकचौरी तक टैक्सी या शेयर्ड जीप से 1.5-2 घंटे। गांव में गाड़ी पार्क करके ट्रेक शुरू करें।
Kartik Swami Temple के पास कहां रुकें
ऑप्शन साधारण लेकिन आरामदायक हैं:
- कनकचौरी में – सबसे पॉपुलर, सस्ते कमरे (₹1500-2500), घर का खाना।
- गांव में होमस्टे या गेस्टहाउस।
- ज्यादा कम्फर्ट के लिए रुद्रप्रयाग के होटल में रुककर डे ट्रिप करें।
- मंदिर के पास आश्रम में रहना भी संभव (अपना सामान लेकर, डोनेशन बेस पर)।
कैंपिंग कुछ जगहों पर Allowed है – स्टारगेजिंग के लिए बेस्ट!
Kartik Swami Temple ट्रेक के प्रैक्टिकल टिप्स
- अच्छे ट्रेकिंग शूज पहनें – रास्ते में सीढ़ियां और ढीले पत्थर हैं।
- पानी, स्नैक्स, सनस्क्रीन और गर्म कपड़े साथ रखें (मौसम जल्दी बदलता है)।
- सुबह जल्दी शुरू करें ताकि अच्छी लाइट और कम बादल मिलें।
- जगह पवित्र है, शांति का सम्मान करें।
- जरूरत पड़े तो लोकल गाइड लें (जरूरी नहीं)।
- ट्रेक पर दुकानें नहीं, कनकचौरी से सामान ले लें।
2026 की उत्तराखंड ट्रिप में कार्तिक स्वामी मंदिर क्यों शामिल करें
यह जगह सिर्फ मंदिर नहीं – हिमालय की शांति में छोटा सा ब्रेक है। चोप्ता या तुंगनाथ से कम भीड़, लेकिन उतना ही खूबसूरत। पास के रुद्रप्रयाग संगम, चोप्ता मैदान या देवरिया ताल जोड़कर परफेक्ट गढ़वाल ट्रिप बना सकते हैं।
आशीर्वाद, फोटो या सिर्फ ताजी हवा के लिए – कार्तिक स्वामी मंदिर ट्रेक आपको तरोताजा कर देगा। 2026 में इस छिपे हुए उत्तराखंड खजाने पर जाएं – पछतावा नहीं होगा!





